बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा

प्रमुख सुरक्षा दिशानिर्देश और सिद्धांत

Wed Jan 7, 2026


1. पर्यवेक्षण और साथ का महत्व
बच्चों को सड़क पर अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। वयस्क मार्गदर्शन और उपस्थिति दुर्घटनाओं को रोकने में एक महत्वपूर्ण कारक है।
सड़क पर अकेले न चलना: बच्चों को हमेशा किसी बड़े या अभिभावक के साथ सड़क पार करनी चाहिए। अकेले चलने से वे तेज गति वाले वाहनों या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं जैसे खतरों के संपर्क में आ सकते हैं।
माता-पिता का साथ लेना: बच्चों में माता-पिता या किसी वयस्क के साथ चलने की आदत डालनी चाहिए। माता-पिता सड़क सुरक्षा के महत्व को प्रभावी ढंग से समझा सकते हैं और सुरक्षित सड़क पार करने की तकनीकों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
2. यातायात नियम और सुरक्षित क्रॉसिंग
यातायात नियमों की मौलिक समझ और सुरक्षित क्रॉसिंग प्रथाओं का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए आधारभूत है।
क्रॉसिंग पर रुकना और देखना: सड़क पार करने से पहले, बच्चों को क्रॉसिंग पर रुककर दोनों दिशाओं में देखना सिखाया जाना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क खाली है। जेब्रा क्रॉसिंग जैसे निर्दिष्ट स्थानों का उपयोग करना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है।
ट्रैफिक नियमों का अभ्यास: बच्चों को बचपन से ही ट्रैफिक नियमों का पालन करना सिखाया जाना चाहिए। इसमें लाल बत्ती पर रुकना, हरी बत्ती पर चलना और वाहन चालकों को प्राथमिकता देने जैसे नियम शामिल हैं। इन नियमों का पालन उन्हें सुरक्षित रखने के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाता है।
3. व्यक्तिगत सतर्कता और व्यवहार
बच्चों को अपने परिवेश के प्रति जागरूक रहने और सड़क पर सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
सड़क पर ध्यान केंद्रित रखना: सड़क पर चलते समय बच्चों को पूरी तरह से सतर्क रहना चाहिए। उन्हें मोबाइल फोन पर बात करने या खेलने जैसी ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों से बचना सिखाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे वे आने वाले खतरों से अनजान हो सकते हैं।
वाहनों के पीछे छिपने से बचना: बच्चों को यह समझाना महत्वपूर्ण है कि खड़े वाहनों के पीछे कभी न छिपें। इससे वे वाहन चालक की नजरों से ओझल हो जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है। उन्हें हमेशा खुले स्थान पर चलना चाहिए और वाहनों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
सड़क पार करते समय धीमा रहना: बच्चों को दौड़कर सड़क पार करने से सख्ती से बचना चाहिए। दौड़ने से प्रतिक्रिया का समय कम हो जाता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। धीमी और स्थिर गति से सड़क पार करना अधिक सुरक्षित है।
खेल के दौरान सतर्क रहना: बच्चों को सड़क पर खेलने से बचना चाहिए और इसके बजाय पार्क या खेल के मैदान जैसे सुरक्षित स्थानों का उपयोग करना चाहिए। यदि सड़क के पास खेल रहे हैं, तो उन्हें अचानक सड़क पर भागने से बचना चाहिए और आसपास के यातायात पर ध्यान देना चाहिए।
4. विशिष्ट परिदृश्यों में सुरक्षा
विशिष्ट स्थितियों, जैसे स्कूल बस या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय, अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।
स्कूल बस की प्रतीक्षा करना: स्कूल बस का इंतजार करते समय, बच्चों को सड़क के किनारे से सुरक्षित दूरी पर खड़ा होना चाहिए। उन्हें बस के पूरी तरह रुकने और दरवाजे खुलने के बाद ही चढ़ना या उतरना चाहिए। बस से उतरने के बाद, सड़क पार करने से पहले दोनों तरफ देखना आवश्यक है।
सार्वजनिक परिवहन का सही उपयोग: सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय, बच्चों को व्यवस्थित तरीके से चढ़ना और उतरना चाहिए। यात्रा के दौरान, उन्हें अपनी सीट पर बैठना चाहिए। यदि संभव हो तो उन्हें किसी वयस्क या कंडक्टर की सहायता से यात्रा करनी चाहिए।
निष्कर्ष
बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा एक गैर-परक्राम्य प्राथमिकता है। ऊपर उल्लिखित दिशानिर्देशों और नियमों की शिक्षा और निरंतर अभ्यास के माध्यम से, बच्चों को सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस किया जा सकता है। इन सुरक्षा आदतों को स्थापित करने की जिम्मेदारी माता-पिता, अभिभावकों और समाज की है, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके और एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

Administrator
Narendra Arya Chief Safety Officer in a PSU